Jab Pyar Beshumar Hai Phir Kyu Shadi Se Inkar Hai | Poetry | Rachna Rajasthani | Gtalks

 Jab Pyar Beshumar Hai Phir Kyu Shadi Se Inkar Hai | Poetry | Rachna Rajasthani | Gtalks

Jab Pyar Beshumar Hai Phir Kyu Shadi Se Inkar Hai इस Poetry की लेखिका Rachna Rajasthani है और इस Poetry को Gtalks के लेबल तहत इसे पेश किया गया है 

Jab Pyar Beshumar Hai Phir Kyu Shadi Se Inkar Hai
Jab Pyar Beshumar Hai Phir Kyu Shadi Se Inkar Hai



वो अल्हड अदाए मेरी वो मेरी नादानियाँ

वो सब शरारतें मेरी वो मेरी मनमानियां

वो सिरियस बात पर हसना मेरा वो हस्ते हस्ते रोना मेरा

वो बेपनाह प्यार करना मेरा वो बेवजह का लड़ना मेरा

वो बेबाकी से बात करना मेरा वो बिन मतलब अकड़ना मेरा

वो मॉडर्न ड्रेसेस पहनना मेरा बनठन रहना और सवरना मेरा

तू कहता था इन्ही सब बातो ने दिल चुरा लिया

की तू सपना देखता है मेरे रातो मैं

तू कहता था की मेरे बिन ना रह पायेगा तू ना मिली तो मर जायेगा

तो जान जब प्यार बेशुमार है फिर क्यों शादी से इनकार है




कल तक जो अदाए लुभाती थी तुझे आज उन्ही अदाओं से तुझे इंकार है

की तू प्यार तो बहुत करता है मुझसे पर शादी के लिए नहीं लगते तुझे सही मेरे संस्कार है

कल तक जिस मॉडर्न लड़की को देख दोस्तों के सामने इतराता था तू

ओये #Bhabi है तेरी बोलकर उनकी नजरे झुकवाता था तू

की आज वो ही मॉडर्न लड़की तेरे घर वालो की नजरो मैं बेकार है

की घर रिश्ते जिम्मेदारियां नहीं संभाल पाऊँगी मैं

इसलिए शादी के लिए तुझे किसी घरेलु लड़की की दरकार है

फिर भी मैं प्यार पे सवाल न उठाऊ तेरे

क्युकी प्यार तू अब भी करता बेशुमार हैथो

तो जान जब प्यार बेशुमार है फिर क्यों शादी से इनकार है




ये जात पात ये कुंडलियों का मिलन ये दुनिया दुनियादारी

क्या हो गया है तुम्हे कल तक तो बेईमानी ये बाते सारी

उस वक़्त न कुंडलियां मिलवाई तुमने न माँ पापा की याद दिलाई तुमने

जब मिलने मुझसे आते थे मुझे देख देख मुस्काते थे

तोहफों की दुकान लगाते थे मेरे दोस्तों पर इम्प्रेशन जमाते थे

बस प्यार प्यार की रठ लगाते थे

नहीं आता है कुछ तो मैं सिख जाउंगी

क्या चाहिए तू बोल वो कर के दिखाउंगी

यु बहाने न बना ना बेहला मुझे मेरी कमियां न गिनवा मुझे

अरे मैं तुझे पसंद हु तू अपनी पसंद पे ऐतबार तो कर

जित लुंगी सबका मन एक मौका तो दे अपनी महोब्बत पर एक उपकार तो कर

प्यार करता है अगर तो हर चुनौती स्वीकार कर

इन बेकार की बातो से न महोबत को शर्मसार कर

जब भर चला है मन तो नज़रे मिला और बोल

यु रीत रिवाज़ समाज की आड़ मैं ना वार कर

थाम के हाथ तू कहता था तुझे प्यार है बेशुमार है

तो जान जब प्यार बेशुमार है फिर क्यों शादी से इनकार है

आशा करते है दोस्तों आपको यह Gtalks की Poetry "Jab Pyar Beshumar Hai Phir Kyu Shadi Se Inkar Hai" By Rachna Rajasthani  बेहद पसंद आई होगी इसे पढ़ने के लिए धन्यवाद 

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